स्तुति
बड़ादेव का सुमिरन करके, मातृ भूमि करौं प्रणाम।
जय सेवा माँ काँकाली की, जय जोहार हो सगा समाज।
वायु जलधि आकाश, पाताल, सूर्य, चन्द्र तारे गणदेव।
अग्नि देवता अन्न देव तू भुज्या बाबा जय गुरुदेव।
गोंडी धर्म गुरु पांडी, जय जय जय हो कुपार लिंगो।
फड़ापेन संजोर पेन तू, बूढ़ा पेन माता जंगो।
चैन सिंह ठाकुर गौहा ठाकुर, घाटवरिया गौहानी माई।
बागा भुइया खुटा पाथर, संबल पुर के मा समलाई।
विन्ध्याचल के विन्ध्य वासिनी, मैहर की शारदा भवानी।
बरम भवानी मां दुर्गे तू, पनिहारिन महिषासुर देव।
गोंडवाने की आदि शक्तियाँ, देव देवियों को वंदन करूँ।
माता, पिता, गुरु गुरु कोटि कोटि सत् नामांकन।(@)
No comments:
Post a Comment