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Wednesday, 22 January 2025

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बिस्तर पर लेटकर रील्स देखने की लत से युवाओं में ब्लड प्रेशर बढ़ रहाः शोध

 लेटकर रील्स देखने की बात यह है कि लता से लड़के का खून बढ़ रहा है


अभियांत्रिकी |##


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रात में सोने से पहले लेटेकर रील्स देखने के लिए स्वास्थ्य की तलाश करें। चीन के हेबेई मेडिकल यूनिवर्सिटी के अध्ययन के अनुसार, जो लोग रात में रील्स देखने में अधिक समय बिताते हैं, उनमें रक्त की कमी और रक्तचाप की समस्या बढ़ जाती है। सोने से पहले रील्स देखने से सिम्पथेटिक अराउज़ल होता है, जो डांस बढ़ाने का कारण बनता है। उन्होंने समय-समय पर स्क्रीन को नियंत्रित करने और स्वस्थ्य परंपरा की सलाह दी है ताकि रक्तचाप और रक्तचाप कम हो सकें।


विशेषज्ञ के अनुसार, आनुवंशिकता में बदलाव से हाइपरटेंशन के खतरे को कम करना महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञ ने यह भी बताया कि 'पैराम्प्रिक स्क्रीन टाइम' यानी टीवी देखना, वीडियो गेम और कंप्यूटर का उपयोग करना शारीरिक व्यायाम से भी शुरू होता है, जबकि देखने में लेटकर रील्स देखने का समय ज्यादातर शामिल होता है।@@

Saturday, 18 January 2025

विस में रखा जंगल सत्याग्रह का प्रीमियर, भाजपाई देखने नहीं गए

 विस में रखा जंगल सत्याग्रह का प्रीमियर, भाजपाई देखने नहीं गए


भोपाल 1930 के स्वतंत्रता संग्राम में बैतूल के आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान पर बनाई गई फिल्म जंगल सत्याग्रह का सोमवार को विधानसभा में प्रीमियर शो रखा गया। यह फिल्म आदिवासी कलाकारों द्वारा बनाई गई, जिसमें दो विधायकों ने भी अभिनय । प्रीमियर का आयोजन पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने किया था। इसमें कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कई नेता पहुंचे। लेकिन भाजपा की तरफ से कोई नेता इस फिल्म को देखने नहीं आया। इस पर दिग्विजय ने कहा कि उनकी रुचि कश्मीर फाइल्स, केरला, साबरमती एक्सप्रेस जैसी फिल्मों में हैं। जिनमें हिंसा और नफरत दिखाई जाती है। उन्होंने मांग करी कि इस फिल्म को टैक्स फ्री किया जाए। इस फिल्म के डायरेक्टर प्रदीप उइके ने बताया कि पीएससी एग्जाम में जंगल सत्याग्रह पर प्रश्न पूछा गया था। उसके बाद मैंने सरदार गंजन सिंह कोरकू के बारे में पढ़ना शुरू किया। 3 साल में पूरी कहानी खोज पाया और फिल्म बना दी।

अनूठी साधना

 त्रिवेणी साधना


10 लाख लोगों ने 21 नवीनीकरण के साथ कल्पवास शुरू किया


महाकुंभ के साथ कल्पवास शुरू हो गया है। इस साल 10 लाख से ज्यादा लोग कल्पवास करेंगे। तीर्थराजपुरोहित श्याम सुंदर पांडे के अनुसार, कल्पवास का अर्थ संगम तट पर एक निश्चित अवधि तक निवास करना है। कल्पवास के 21 नियमों में गद्दारी, जिनमें गंगा स्नान, फलाहार, दुर्व्यसनों का त्याग, सत्य, अहिंसा और ब्रह्मचर्य का पालन शामिल है।


कुंभ में अपनी ब्रांडिंग पर 3,000 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी


विभिन्न महाकुंभ के माध्यम से भारतीय उद्योगपति अपने ब्रांड के प्रचार में लगे हुए हैं। महाकुंभ में निगम द्वारा 3,000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। आईटीसी, कोका-कोला, अडानी, रिलाएंस, बिसलेरी जैसे प्रमुख निवेशक इस समारोह में अपने ब्रांड की उपस्थिति बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रहे हैं। ब्रांडिंग के लिए सबसे अधिक फोकस स्नान क्षेत्र के पास है।

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बड़ादेव का ध्यान धरे

 बड़ादेव का ध्यान धरे


महुंडी पर्वेन सगाता, गितुर सगा, समा सहज विहार ता। परेड फड़ापेन सुयमोध सिधाना मिकुन मोड़ प्रचंडिड तूर पौरद मांदा। स्कुमता सेरुण झंडज्ञ, दाई हिरवा नोर मेरीन पद्दी कुपार लिंगो। ओ मावीर इमा सल्लेर गागीर नालेज पूर्वा, भुई नोर सुक्ति तांग मेंतो रोम, ओ फदोर शक्ति্য ससूर पेन्टा, मन माई तुन, रक्षा किंट। इन मन सुक्ति सुसूर पेंटा, मन माई तून, रक्षा किंट। इन माइंड इमामा मोट फदोर सुक्ति परोल पान तुन। खैतो शशी ज्योति कलश इमा जायसादि तो नोम, सुमिरिनदि तो नामांकित पूजा तो नोम, एनडोल कम्का नुंका बिदुको अधोदान पीर अदि, वृत्ता तो नोम पुरखा तो नोम। सबरे मंदासी दवासी कोया सयाम, पंडापेंटा। नोट - (देव पूज्य में चढ़े पान प्रसाद एवं नारियल तोड़ना)

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बड़ादेव का प्रार्थना

 बड़ादेव की प्रार्थना


बड़ादेव शक्ति प्रदान करो, तेरे चरण का पुजारी बन जायेगा।

 बड़ादेव कृपा कर दो हम पर, हम शक्तिशाली बन जायेंगे। 

हर रोम रोम मेरे वास करो, तन मन गंदगी को नाश करो अब ऐसी ज्योति जला दो देवा, मेरे अंधकार सब मिट जावे।

 बड़ादेव अज्ञान भरा है मुझमें ज्ञान नहीं, मेरी सेवा में मान सम्मान नहीं।

 सेव भाव मुझमें ऐसा भर दो, सेवा कार्य में लग जावे।

 बड़ा देव हे बड़ादेव जय सेवा, सकल सम्माने जय सेवा। 

अब आके दे दो दर्शन हमें, सबकी मनोकामना पूरी हो जावे।

 बड़ादेव सुनो बुलाओ बड़ादेव अरजी, देना नि देना यह मर्जी।(@)

सम्पूर्ण सगा समाज को महावृत कथा सुनाना

 संपूर्ण गाथा समाज को महावृत कथा सुनाना


कथा के बाद रार विद्वानों की होम लांघन, सेवा-सेवा वनकिड।


सेवा जय सेवा, बड़ेपेन निया सेवा, जय सेवा सेवा


जय सेवा सेवा माँ और आदि शक्ति, बड़ी पेन नीया सेवा


जय सेवा सेवा इमा और साजा मदाते मदनी, जय सेवा सेवा। इमा एंडी सल्लेर गैंगेर, बड़ी पेन निया सेवा। जय सेवा सेवा आईएमए एंडी येर वेरी, जय सेवा सेवा बड़ापेन सेवा सर्विस बड़ी पेन निया सेवा, जय सेवा सेवा आईएमए एंडी कीस आनी मोड़,


बड़ी पेनीया सेवा, जय सेवा सेवा आईएमए और तोडी पोखराल


बड़ी पेनीया सेवा, जय सेवा सेवा इमा एंडी नारायण शूर

बड़े पेन निया सेवा, जय सेवा सेवा आईएमए एंडी कोला शूरसे पेन निया सेवा, जय सेवा सेवा आईएमए एंडी हीरा ज्योति बड़े पेन निया सेवा, जय सेवा सेवा आईएमए एंडी मनको सुंगल बड़े पेन निया सेवा, जय सेवा सेवा आईएमए एंडी तुरपो राय, बड़े पेन निया सेवा, जय सेवा सेवा आईएमए और शक्ति सीमा, बड़े पेन निया सेवा-सेवा, जय सेवा सेवा आईएमए और सारे कीम बड़े पेन निया सेवा ....माँ नीबा काल करीं तोमा, बड़ी पेन नीया सेवा

1. तराल गोगो ना सेवा सेवा

2. सरल गोगो ना सेवा सेवा

3. मेराल गोगो ना सेवा सेवा

4. सुकाल गोगो ना सेवा सेवा

5. सुंगल गोगो ना सेवा सेवा

6. मुलाल गोगो ना सेवा सेवा

7. माल गोगो ना सेवा सेवा

8. भल गोगो ना सेवा सेवा

9. फल गोगो ना सेवा सेवा


10. अदाल गोगो ना सेवा सेवा


11. ओडल गोगो ना सेवा सेवा


12. अपदाल गोयो ना सेवा सेवा


13. महागोगो गोगो ना सेवा सेवा


14. बचा हुआ गोगो ना सेवा सेवा


15. मैका गोगो ना सेवा सेवा


16. लाल गोगो गोगो ना सेवा सेवा

17. ताल गोगो ना सेवा सेवा


18. नेका गोगो ना सेवा सेवा


19. वही दाल गोगो ना सेवा सेवा


20. महिदाल गोगो ना सेवा सेवा


21. दीपा दल गोगो ना सेवा सेवा


22. नोंदा गोगो ना सेवा सेवा


23. भोइंदा गोगो ना सेवा सेवा


24. धनवा गोगो ना सेवा सेवा

25. पेंदा गोगो ना सेवा सेवा। .


26. चिता गोगो ना सेवा सेवा


27. भन्था गोगो ना सेवा सेवा

28. घनाई गोगो ना सेवा सेवा


31. हीरा


29. नारायण शूर भुमका ना सेवा सेवा


32. मनक


30. कोलाशूर भूमका ना सेवा सेवा

31. हिसामोति भूमका ना सेवा सेवा(@)


सेवा


32. मनको सुंगल भुमका ना सेवा सेवा


33. तुरपोराय भुमका ना सेवा सेवा

भिम्मल पेन ना सेवा सेवा भज्ष पेन ना सेवा सेवा


• जाटवा पेन ना सेवा सेवा मुकेशा पेन ना सेवा सेवा


हिरवा पेन ना सेवा सेवा पंडरी दाई ना सेवा सेवा


कोरावा पेन ना सेवा सेवा पुंगुर दाई ना सेवा सेवा


• बनवाए पेन ना सेवा सेवा मुग़र दाई ना सेवा सेवा


• कुशार दाई ना सेवा सेवा महा माई ना सेवा सेवा


माँ भगवती खेरोदाई नो सेवा सेवा महा माता ना सेवा सेवा


अरू अरू शम्भू ना सेवा सेवा मरही दाई ना सेवा सेवा


गवारादाई ना सेवा सेवा शारदा देवी ना सेवा सेवा


माँ काली कंकाली ना सेवा सेक रहवेदी दाई ना सेवा सेवा


धर्म गुरु लिंगो बाबा ना सेवा सेवा चंडी दाई ना सेवा सेवा


माँ रयताद जंगो ना सेवा सेवा विरसनी दाई ना सेवा सेवा

. बूढ़ी दाई ना सेवा सेवा नौरंग देवी ना सेवा सेवा


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• मंढिया देवी ना सेवा मंढिया देवी ना ना


•विमल महेश्वरी माई ना पादवा पहारनी ना सेवा सेवा


• दन्तेश्वरी दाई ना सेवा सेवा जोड़ी संघरानी ना सेवा सेवा


• तपेश्वरी दाई ना सेवा सेवा अँधर से की गई ना सेवा सेवा


•विल्माई माई ना सेवा सेवा राजराजेश्वरी ना सेवा सेवा


• कलवा देवी ना सेवा सेवा अन्न माता ना सेवा सेवा


चौसठ जोगनी ना सेवा सेवा मातृशक्ति ना सेवा सेवा


• लंगकैन दै ना सेवा सेवा पितृशक्ति ना सेवा सेवा


•महाकाली ना सेवा सेवा पुरखों के देवी देवता ना सेवा सेवा


• अंग्रेजी दाई ना सेवा सेवा खैर खूट के देवी देवता ना सेवा सेवा


विज्ञान दाई ना सेवा सेवा खिला मूडवा ना सेवा सेवा


• माँ नामकरण ना सेवा सेवा हरदूलाल ना सेवा सेवा

गंगा गोदावरी ना सेवा सेवा ठाकुर देव ना सेवा सेवा


सातें समुंद्र ना सेवा सेवा पणघट के पनिहारिन माई ना सेवा सेवा


आकाश देवता ना सेवा सेवा घाट के घाटविया ना सेवा सेवा


• पवन देवता ना सेवा सेवा डांगुर के डोगराहा ना सेवा सेवा


अग्नि देवता ना सेवा सेवा जोगन पितृ ना सेवा सेवा


• जल देवता ना सेवा सेवा पिता बाबा ना सेवा सेवा


• चंदा सूरज ना सेवा सेवा सिद्ध बाबा ना सेवा सेवा


• गौ माता ना सेवा सेवा भैरव बाबा ना सेवा सेवा


छापर के चित्रहिं ना सेवा सेवा


आहार पहाड़ के देवी देवता ना सेवा सेवा


गढ़ा गढ़ी के देवी देवता ना सेवा सेवा


पेड़ के उपचार ना सेक सेक


• जीव जंतु ना सेवा सेवा


• बाबन गढ़ संतवन परगना के देवी देवता ना सेवा सेवा


भूले बिसरे देवी देवता ना सेवा सेवा


राउडा पैट ना सेवा सेवा

•एरा सेल पैट ना सेवा सेवा


सेवा सेवा


•सिहार पाट ना सेवा सेवा


वा सेवा


• थम्मीरा पाट ना सेवा सेवा


सेवा


• बोदा पाट ना सेवा सेवा


• भोगरा पाट ना सेवा सेवा


भवर पाट ना सेवा सेवा


• तुमेल पैट ना सेवा सेवा


• दत्तइँया पति ना सेवा सेवा


बगना पाट ना सेवा सेवा


• कोटियार पाट ना सेवा सेवा


•मुर्गा पाट ना सेवा सेवा


•घाटे की दुकान ना सेवा सेवा


• सगा समाजना ना सेवा सेवा

मूढ पूजा के लिए पूजन सामग्री

 मूढ़ पूजा के लिए पूजन सामग्री


1. ) नारियल 3 या 5 से अधिक


2.) चंवल


3.)कलश - पाँच दिया एवं सहित रुई


4. )स्वच्छ जल


5.)वनस्पति तेल - गुल्ली (महुआ) का तेल हो तो और भी।


6.)रोटी मलीदा का प्रसाद


7.)लुभान एवं रार


8.)हल्दी गठान जो चलती है देवदारी हो बुनियाद ही चढ़ जाती है।


9.)बेलपाती


10.)चौक के चार देशों में और मध्य में स्वाय पीली चावल के प्रमाण से उस पर कलश स्थान पर।


11.)महुआ फूल या अन्य मौसम के अनुसार


12. साजा के पत्ते और पलाश के पत्ते


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मूढ पूजा विधि विधान

 मूढ़ पूजा विधि विधान


पारिवारिक पूजा विधान निर्माण समय कुछ नियम विधि विधानों का पालन करना चाहिए।


1. गोंडी पुनेम के उपासक इस बात का विशेष ध्यान दें कि वह पूजन कार्य तमी संपत्र पात्रं जब कि परिवार के सभी सदस्यगण शुद्ध पवित्र हों। इसी प्रकार भुमका, पुजारी या बाघा जो पूजन कार्य करता है वह भी नियमों का पालन करने को कहता है।


2. मिट्टी से पूजन स्थल को लीप कर शुद्ध करें। उस पर पीसी हल्दी माँ आटा से चौक बनायें।


3. लकड़ी का पत्ता या साजा या साई के पटाल चौक के बीचों-बीच।


4. पांचवां कलश पानी नामांकन चौक चार और मध्य भाग में एक कलश दीप जलाना स्थान। चार कलश छोटे एवं एक बड़ा होना चाहिए।


5 भुमका, पुजारी या बागा को दक्षिण की ओर मुख करके पूजा करनी चाहिए।


6. पूजा में बैठने वालों की दिशा जिसमें पति-पत्नी या किसी भी व्यक्ति का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।


7.पूजा करने वाले को नया धोती कुर्ता और महिमा को भी नई पोशाक पहनना चाहिए।


8.पूजा वाले भुमका को धोती कुर्ता और पगड़ी शिष्टमंडल की उपाधि।


9.पूजा करने वालों को भी पलास के पत्तलों का आसन करना चाहिए।


10. पूजन के दिन उपवास रखना चाहिए और पूजन विधान पर ही भोजन ग्रहण करना चाहिए।


11. पूर्वान्हित अर्थात रविवार को पूजा करना शुभ माना जाता है।


12.चौके के पटल पर कलश के सामने फड़ापेन के नाम से एक मुठ पांच भुमका सगाओं के नाम से पांच मुठ और सात सगाओं के नाम से सात मुठ चांवल या जवारी क्रमवार कतार से रखा गया।

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गोंडी पुनेम ध्वज गीत

 गोंडी पुनेम ध्वज गीत


धर्माचार्य मोतीरावणजी कंगाली


गोंडी पुनेम झुंडा येरुंग रंगता मावा।।


वीडियो कुण दुग्गल मन्नी जय सेवा।


सबुते गोंडी तर्मुक उंडी आयोटे।


झुंडा अपोता कयदे बीथिते।


राज पुनेम लय कायजा कियते।


हिदे वेहतिता गोंडी पुनेम मावा।

वीडियो कुण दुगल मन्नी जय सेवा।। .. 

जुंदा नेली बिन लाइके नितीते। 

अमोत राजलाई कायजा कियते। 

गोंडवाना जय-जय सेवा इन्नेते। 

अमोत अक्तियार येतिकोम मावा।

 विडीसी कुण दुगल मन्नी जय सेवा।। 2..


तेना बनसनमलाई अमोते. 

गोंगो सियाकोम मावा नैचुरते। 

बस्के यतिकोम गोंडवाना अमोते। 

अस्के अयारे सयगोर अन मावा। 

वीडियोस कुण दुगल भन्नी जय सेवा ।।3।। 

मावा शक्ति मावाय झुंडा। 

मावा जुगती मावाय झुंडा। 

मावा नियति मावाय झुंडा।

 तेन ली जीवा सिया कोम मावा।

 वीडियो कुण ढुगल मन्नी जय सेवा।। 4.. 

प्रसापेन तुन सेवा-सेवा।

 मुठवा लिंगो ने सेवा-सेवा। 

जंगो रायताने सेवा-सेवा, 

गोदी सगुणंग जय-जय सेवा।

 वीडियो सिकुन दुगार मन्नी जय सेवा-सेवा।। 5..

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स्तुति

 स्तुति


बड़ादेव का सुमिरन करके, मातृ भूमि करौं प्रणाम।


जय सेवा माँ काँकाली की, जय जोहार हो सगा समाज।


वायु जलधि आकाश, पाताल, सूर्य, चन्द्र तारे गणदेव।


अग्नि देवता अन्न देव तू भुज्या बाबा जय गुरुदेव।


गोंडी धर्म गुरु पांडी, जय जय जय हो कुपार लिंगो।


फड़ापेन संजोर पेन तू, बूढ़ा पेन माता जंगो।


चैन सिंह ठाकुर गौहा ठाकुर, घाटवरिया गौहानी माई।


बागा भुइया खुटा पाथर, संबल पुर के मा समलाई।


विन्ध्याचल के विन्ध्य वासिनी, मैहर की शारदा भवानी।


बरम भवानी मां दुर्गे तू, पनिहारिन महिषासुर देव।


गोंडवाने की आदि शक्तियाँ, देव देवियों को वंदन करूँ।


माता, पिता, गुरु गुरु कोटि कोटि सत् नामांकन।(@)

कपूर जलाना

 कपूर जलाना


सब लोग कपूर थाली को एक पेंटिंग को बताना चाहते थे। संकल्पबनाना है। एकता का प्रतीक.


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- 1. कुपार लिंगो ऽऽऽ लिंगो "शंभू गौरा" सल्लगर सेवा (5 बार)


2. पुनेम सीमा ऽऽऽ धन सीमा ऽऽऽ बल सीमा ऽऽऽ मोड़ विरची किम ऽऽऽ (5 बार बोलिए)।


फ़फ़ापेंटा सेवा-सेवा। धर्मगुरु कुपार लिंगोना सेवा-सेवा।


जन्म सयै दै-दौ, सेवा-सेवा


सेवा-सेवा।


मंत्र- हे फफापेंती निया परोल ता कपूर ता ज्योति मासी तोरोम सब कोया सगा बिदारते ज्योति मसिना सिकाटिके हिलना हिदे मिन्नत किस कुन, धरती दाई न कोराते ज्योति इरसी कुन येर सारा तोरोम

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सर्वोच्च शक्ति शान्ति मंत्र

 सर्वोच्च शक्ति शान्ति मंत्र


सुर्वेय सुक्ति सेराल गोरा सुर्वेय सेवा सजोर पेन्ता। सुर्वेय सर्दी कोया पुनेमता सुर्वेय सेवा पारंड गंग रांग।


ओ... मावोर इद सिरडी सिंगार ते गणपति गणाधिपति गणपेनता। सर्रेका मरी सेराल गोरा पन्डरी पुंगार कुशार गणसेविका। इद निक्को बेरा तेत अमोट तल्ला नवे कीसी,


तल्ला कोटसी - जय सेवा कियातोनोम ।


मीवा शीतल तत्वानुंग अमोट मीकून तरिहत्तोनोम, ओऽऽऽमावोर सुर्वेय सुक्ति अमोट मीकून तरिहत्तोनोम, ओऽऽऽमावोर सुर्वेय सुक्ति सल्लेर गांगेर लिंगो सुयमोद बेरची जय सगा पेन पारड सगा गोगो नुंग।


इद निक्को बेरा ते आमेट मीकुन तल्ला कोटसी जय सेवा कोयागोदा नरगोदा मिनगोदा रैयगोदा पेन्चगोदा।। पेन गंगा वेन गंगा हीरो गंगा गुप्तगंगा गोदावरी। येरूं समुन्दरे पद सारू धारा ते हद सिरडी सिंगार संयुगार द्वीपता। परोल येर सारे कियातोनोम ।


अर्थ :- तैतिस कोट मुठवाओं न धरती माँ के तैंतीस मूल तत्वों की जानकारी प्रदान की। उन्हें हम कोयातुर सगाजन गोंगो 'देवता' कहते हैं। सम्पूर्ण कोया बिडार को (गोंड समाज) बारह घटकों में बांटकर तैंतीस मूल तत्वों के प्रतीक गोंगो अर्थात् सगा देवताओं के रूप में मानते हैं। यही सनातन धर्म है। इनकी पूजा आज भी हम समय-समय पर करते हैं।इस प्रकार कोयतुरी की आदिम व्यवस्था दुनिया के मानव सभ्यता में सर्वश्रेष्ठतम व्यवस्था है। जो वैज्ञानिकता पूर्ण है।


तँतिस कोट अर्थात् तैंतीस देव पारा कीसा मूंगा, मोती, नीलम, पन्ना, पुखराज, रेडियम, कैल्शीयम, जस्ता, फॉस्फोरस, गन्धक, हीरा, सोडियम, लोहा, रांगा, एल्युमीनियम, सिलिकान, युरोनियम, लिटेशियम, टीना, मोनिवेडशन, निकिल, ब्रोमीन, तांबा, करब, क्रोमियम, सोना, चाँदी, मैंगनीज, पंच मुठवा, आकाश, सूर्य, पृथ्वी, अग्नि, वायु, जल शक्ति ही चराचर जगत की सृजन पालन और संहार करने वाले प्रचण्ड आदिम शक्ति है।


ऐसे प्रचण्ड शक्तियों को हम, सत-सत नमन करते हैं। वन्दना करते हैं। बारह सगा, सात गोत्रों के पूज्य बड़ादेव पूज्य पुरखा, पूज्य गुरूओं की वन्दना करते हैं।

फड़ापेन सुमिरन मंत्र

 फड़ापेन सुमिरन मंत्र


सल्लेर गंगेर इमा जीवा जाई। सज़ोर सुक्ति गुणो मन माई।। मति मेंद गोडं एमा पूनो। अव्वल बाबो कयोम कुरुमो।। सिंगार पुंगार निंगार कैसे। कैंजर बेंजर लेंगर मासे।। आकाश पाताल पोकराल सयमो। इमा गर इमा जान इमा रयमो।।


कायमी।।


कायमी।।


चिड़ी मिच्ची जय लमोटिया मुयम्तिया। मटिया उमोटिया सुक्ति अदितिया।। इमा गुर्रे बर्रे बिन्सासी जंतेर। इरवासी कासे सोज़ोर पेन मन्तेर।। अन्न खूट धन खूट जन खूट तोडी। धन्थाय भन्ठाय होलेराय मूडी।। येरा खंडेरा सिरपा महेदा।। सागा तारा मारा मूसी अहेड़ा।। मुठवाल जुगल भुलाल नुसी। इमा नुल्ले डिनरिमा भुजंग बीसी। पुयार रमाकिआ भुंय मूंठ सुक्कम। नलेंज पुरवा निलु भेरू भस्सुम।। तप तेज उन्दे मेत मनमाई सुरवा। पारंड गंगाराग नालेज पुरधा।। इमात अव्वल इमात बाबो।इमात तम्मुरक इमात ताड़ो।


मिकुल फडापेन मिननेट मावा।


मिननेट मावा इमा केंजा केंजा।।


इदामा सुमिरन सोसोरपेन नीवा।।


जोहार जोहार जय सेवा-सेवा।


मिननेट मावा इमा केंजा केंजा।।


इमा केन्ज़ा केन्ज़ा मिननेत मावा।।


1. ओ.... मावोर संयु गुठौली सेराल गोरा।


2. सर्वे पेन तन सल्लेर गंगेर।


3. लिंगो, सुन्यामोद वेरची।


इद निक्को बेरा ते एगोट मिकुन सुमिरिनकेटोनोम। मीवा शीतल तत्वानुंग अमोट मीकुन तारिहत्तोनोम।


1. येर सारेकेटोनोम।


2. कुर्कमका सियाटोनोम।


3. कोया पुगार पंडरी पुंगर तरीहतटोनोम


4. धूप पारा सियाटोनोम।


5. अमोत मिकुन तल्ला कोटसी जय सेवा जय जोहारकितानोम। ओऽऽऽ हद सिरदी सिंगार सृष्टि सल्लेर गंगेर फदा सुक्ति तां मीवा सीतल नेगनुंग अमोट मिकुन तारिहत्तोनोम।

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सगा पेन्कोना सुमिरन मंत्र

 सागा पेनकोना सुमिरन मंत्र


ओऽऽऽ मावोर मुठवाल लिंगो, तिरूमाय जंगो माई कालींकाली माता। धर्म गुरु देवता, हे धर्मगुरु धन्वंतरि हम पूजन वन्दना करते हैं। हमें शक्ति प्रदान करें।


हे कोयतागापा खंडाक कोयामुरी द्वीप के सागा देवी देवताओं और चार राजवंशों के पुरखाओं में हे ताराल गोगो 'पारा' सरला शीश्या परला गोंगो 'मोती' मुगा जुगार गोंगो रेडियम।

और

आदिम मानव धर्म गुरु फांदी पारी कूपर लिंगो जिन तांतिस कोट कलहल और भूतलचिल्ड्रन को पुयेनेम गोंडी धर्म की शिक्षा दी गई है उहें ही तांतिस कोट मूठ लिंगों के नाम से जाना जाता है। उन धर्म मुतवाओं ने अनंत सृष्टि और चराचर जगत के उद्भव पालन और संहार करने के लिए अनादि शक्तियों की जानकारी सुयोद (सत्यज्ञान) के माध्यम से प्राप्त की और धर्म उपदेशों के माध्यम से कोया पुत्रों को प्रदान किया ताकि भूतल के अण्डज पिण्डज स्वेद और उदमिज मंत्र के कल्याण संभव हो सके। अन्य मुठवाओं की शिक्षा से मानव-प्राणि जीवन को सुखमय शातिमय बनाना संभव है।


आदि गुरु पहाड़ी कुपार की आज्ञा के अनुसार आदि पृथ्वी के तैतीस मूल रचना का सुयमोद अर्थात सत्वज्ञान के माध्यम से जाना और कोयापुत्रों को उपदेश दिया कि सृष्टि के उत्पत्ति पालन और संहार करने में तांतीस मूल रचना की प्रमुख भूमिका है। चराचर जगत के सृजन पालन और संहार तथा संरक्षण के पंच भूल प्रचंड शक्तियों की विशेष कृपा है, संपूर्ण संपूर्ण सृष्टि ऋणी है उनका हम पूजन करते हैं, उन्हें नतमस्तक प्रणाम करते हैं।

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माई सुमरिन मंत्र

 माई सुमरिन मंत्र


केकासिनी सतवाहनी शीतला दन्तेश्वरी। हिमलाजिन महामाई, चित्तौवर बिमलेश्वरी।। महा माया महामाता विमलाई तपेश्वरी। कुशार माई खैरदाई पुंगुर मंगुरी।। कोया मानवलकुन वेहत्ताना बस ता सारी।। इद निक्को बेरा ते अमोत तल्ला कोत्सी जय सेवायतनोम।


1. धूप पारा सियाटोनोम।


2. कुर्कमका सियाटोनोम।


3. कोया पुंगार तरीहातोमानोम।


4. येर सारे कियोटोनोम।


अर्थ:- हे आदि शक्ति जगत जननी तांतीस कोट "छब्बा पूता" को जन्म देने वाली मां कालिकांकाली, क्रांति की देवी रथर जंगो केकासनी माई, सतवाहनी, शीतला दंतेश्वरी, हिंगलाजिन महा माई महा माता चित्तौवर विमलेश्वरी महा माया विल्मई तपेश्वरी कुशार दई पुंगुर मुंगूर बहुत बढ़िया। आदि शक्ति माँ हमारी कोयतुर गाथा जन को सत्य मार्ग पर चलने की शक्ति देना। हम आपको नतमस्तक खरीद जय सेवा देते हैं। वन्दना करते हैं।(@)

प्रमुख गढ कोट सुमिरन मंत्र

 प्रमुख गढ़ कोट सुमिरन मंत्र


सागर-हर्वाकोट पुरवाकोट मुरवाकोट ता.


पाताल नवकोट बरवा परगना सुदाम ता। सुमाल सिरवा सियाम संभल चंदिया गढ़ जाटवा। संभुर लंका कोट आदिल नंदा कोयली कोयता। लाजी गढ़ कटंगा कोट कट्टा आदिमा अंगा आरा। लिगो गढ़ मंडला (कोट) पुरुडली कोट आंडुर कोयतुरा। इद निक्को बराते अमोत ताला कोटरसी जय सेवाकृतोनोम।


1. धूपपारा सियाटोमा।


2. कुर्कमका सियाटोनोम।


3. कोया पुंगार तरीहतोनोम।


4. येर साराकेटोनोम।


अर्थः- हे कोयतागण खण्डक कोयमूरी द्वीप के आदि पुरखों गढ़ देवी और देवता हे समुन्द्र कोट हरवाकोट (हडप्पा) पुरवाकोट (सूर्योदयाचल) पूर्वाकोट (मोहन जोदड़ो सिन्धु) पाताल कोट, नर्वाकोट बरवाकोट, परगनाकोट, सुदामकोट, सुमालकोट, सिर्वाकोट, सियामकोट, संभल कोट, चादिया कोट, चाइबा कोट, शभूर कोट, लंका कोट, अदिमा कोट, नाडा कोट, कोयली कोट, लांजी कोट, कटंगा कोट, अदिमा कोट, लिंगा कोट, पुरुंडली कोट, आदि सम्पूर्ण कोयटगण खण्डक के सिद्ध प्रयोजनों की हम सभी कोयतुर सगाजन इस पवित्र बेला में वन्दना करते हैं, स्मरण करते हैं पूजा करते हैं, नतमस्तक हो शत-शत प्रणाम करते हैं, सेवा करते हैं कि हमारा मन पूर्ण है।(@)

पुरखाल्क ना सुमरिन मंत्र

 पुरखालक ना सुरमिन मंत्र


ओऽऽऽ इद मावा सूर्यागर दीप तोर सिरजेकिडन वारे पुर्वल्क पुर्मियाल मुठवल्क पुनेम मुठवल्कुन।।


इद्दद निक्को बेराते अमोत मीकुन.तल्ला कोत्सी जय सेवाक्तोनिम्।।


1. कुर्कमका सियाटोनोम


2. कोया पुंगार तरीहतोनोम।


3. धूप पारा सियोटोनोम।


4. तोवा कायांग तरिहतोनोम।


5. येर साराकेटोनोम।


हे मावेर जय परसापेन सल्लेर, गागीर लिंगी सुयमोद बेरची। जय सागापेन पार्रद सागा गोगो मुंग अमोट मिकुन गोगोलोंजोग उडे जोर थानाता सुमिरन जस रोम रोमा उंडे निलकोंडा सयमंडी सियांदी। डांगुर मट्टंग आउत बंथा कूपर भीमगढ़ कोयली। सिन्या बिंदा पुलिमट्टा, पेंडुम वाकलो उमामोली वन सिंगार द्विपद डांगुर मट्टा कम्पो येरुं काजोली वन।। इदामा सिरडी सिंगार सयुगार द्विपता।। कोयता गण खंडाकटा डांगुर मट्टा कम्पो येरुं काजोली वन।। इदामा सिरडी सिंगार सयुगार द्विपता।। कोयता गण खण्डकता डांगुर मट्टाग।। इद मिक्को बेरा ते अमोट तलाकोत्से जय सेवादत्तोनोम।


1. होम धूप सियाटोनोम।


2. कुर्कमका सियोतोनाम।


3. कोया पुंगार, तरीहतोनोम। 4. येर साराकेटोनोम।


अर्थ:- हे चराचर जगत के हे पुमिया मुठवा और धर्म गुरु इस शुभ घड़ी में हम कोयतुर सगाजन (छब्बा पूंटा) सहित आपकी पूजा करते हैं। नतमस्तक जय सेवा करते हैं, नमन करते हैं, वंदना करते हैं। ईसाई पालन और संहारकर्ता बड़ादेव हे देव हमारा मन पूर्ण हो।(@)

नालुंग सुमिरन भिडी ना मंत्र

 नालुंग सुमिरन भिडी ना मंत्र


(चारों वंशों के पूर्वजों का स्मरण मंत्र)


ओऽऽऽ मावोर पुरखाल्कनिट इदामा सिरडी सिंगार।


संयुगार द्विपता नालुंग इफाकता। नालुंग मिडी तोर पोल । शेष नलेंज पुरार सगा गोगो लुंभ।। इद निक्को बेरा ते अमोट मीकुन तल्ला कोटसी जय सेवा कियातोनोम ।।


1. येर सारे कियतोनोम।


2. कुर्कुमका सियतोनोम ।


3. कोया पुंगार पडरी पुंगार तरिहतोनोम ।


4. धूप पारा सियातोनोम ।


अर्थ :- हे चराचर जगत एवं सिंगार द्वीप के चारों सम्भागों के चारों भिडी के सात पोलत्स वंशीय, 6 देव नागवंशी, 5 देव चंद्रवंशीय, 4 देव गुरार वंशीय, सगा देवी देवताओं को इस शुभ घड़ी में हम कोयतुर सगाजन घौवा पूता सहित नतमस्तक होकर जय सेवा करते हैं, नमन करते हैं, वन्दना करते हैं।

नालुंग इफाकता सुमिरन मंत्र

 नालुंग इफाकता सुमिरन मंत्र


(चारों भूखंण के पूर्वजनों का स्मरण)


ओ मावोर पुरखाल्कनिह कोयटागण नालुंग इफाकता उम्मो येरूं सयमाल अयफोक गुट्टा कोरता।


इद निक्को बेराते अमोट मीकुन तल्ला कोटसी जय सेवा कियातोमा।


1. येर सारे कियातोओम ।


2. कुर्कमका सियातोमा


3. कोयापुंगार तरिहत्तोमा।


4. पंडरी पुंगार तरिहत्तोमनाम ।


5. धूपपारा सियाताओम।


अर्थ :- हे कोयटागण खण्डाक के चारों सम्भाग में उम्मो गुट्टा कोर, येरूं गुट्टा कोर, सयमाल गुट्टा कोर अयफोका गुट्टा कोर के हमारे पुरखा पूर्वज हम कोया बिडार के सगा जन आपको नतमस्तक होकर जय सेवा करते हैं, नमन करते हैं, वन्दना करते हैं।

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