: {} }; : {} }; : {} }; गोंडी धर्म गोंगो पूजन विधि : पुरखाल्क ना सुमरिन मंत्र

Ad

Saturday, 18 January 2025

पुरखाल्क ना सुमरिन मंत्र

 पुरखालक ना सुरमिन मंत्र


ओऽऽऽ इद मावा सूर्यागर दीप तोर सिरजेकिडन वारे पुर्वल्क पुर्मियाल मुठवल्क पुनेम मुठवल्कुन।।


इद्दद निक्को बेराते अमोत मीकुन.तल्ला कोत्सी जय सेवाक्तोनिम्।।


1. कुर्कमका सियाटोनोम


2. कोया पुंगार तरीहतोनोम।


3. धूप पारा सियोटोनोम।


4. तोवा कायांग तरिहतोनोम।


5. येर साराकेटोनोम।


हे मावेर जय परसापेन सल्लेर, गागीर लिंगी सुयमोद बेरची। जय सागापेन पार्रद सागा गोगो मुंग अमोट मिकुन गोगोलोंजोग उडे जोर थानाता सुमिरन जस रोम रोमा उंडे निलकोंडा सयमंडी सियांदी। डांगुर मट्टंग आउत बंथा कूपर भीमगढ़ कोयली। सिन्या बिंदा पुलिमट्टा, पेंडुम वाकलो उमामोली वन सिंगार द्विपद डांगुर मट्टा कम्पो येरुं काजोली वन।। इदामा सिरडी सिंगार सयुगार द्विपता।। कोयता गण खंडाकटा डांगुर मट्टा कम्पो येरुं काजोली वन।। इदामा सिरडी सिंगार सयुगार द्विपता।। कोयता गण खण्डकता डांगुर मट्टाग।। इद मिक्को बेरा ते अमोट तलाकोत्से जय सेवादत्तोनोम।


1. होम धूप सियाटोनोम।


2. कुर्कमका सियोतोनाम।


3. कोया पुंगार, तरीहतोनोम। 4. येर साराकेटोनोम।


अर्थ:- हे चराचर जगत के हे पुमिया मुठवा और धर्म गुरु इस शुभ घड़ी में हम कोयतुर सगाजन (छब्बा पूंटा) सहित आपकी पूजा करते हैं। नतमस्तक जय सेवा करते हैं, नमन करते हैं, वंदना करते हैं। ईसाई पालन और संहारकर्ता बड़ादेव हे देव हमारा मन पूर्ण हो।(@)

No comments:

Post a Comment

Ad

.

Ad