नालुंग सुमिरन भिडी ना मंत्र
(चारों वंशों के पूर्वजों का स्मरण मंत्र)
ओऽऽऽ मावोर पुरखाल्कनिट इदामा सिरडी सिंगार।
संयुगार द्विपता नालुंग इफाकता। नालुंग मिडी तोर पोल । शेष नलेंज पुरार सगा गोगो लुंभ।। इद निक्को बेरा ते अमोट मीकुन तल्ला कोटसी जय सेवा कियातोनोम ।।
1. येर सारे कियतोनोम।
2. कुर्कुमका सियतोनोम ।
3. कोया पुंगार पडरी पुंगार तरिहतोनोम ।
4. धूप पारा सियातोनोम ।
अर्थ :- हे चराचर जगत एवं सिंगार द्वीप के चारों सम्भागों के चारों भिडी के सात पोलत्स वंशीय, 6 देव नागवंशी, 5 देव चंद्रवंशीय, 4 देव गुरार वंशीय, सगा देवी देवताओं को इस शुभ घड़ी में हम कोयतुर सगाजन घौवा पूता सहित नतमस्तक होकर जय सेवा करते हैं, नमन करते हैं, वन्दना करते हैं।
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