प्रमुख गढ़ कोट सुमिरन मंत्र
सागर-हर्वाकोट पुरवाकोट मुरवाकोट ता.
पाताल नवकोट बरवा परगना सुदाम ता। सुमाल सिरवा सियाम संभल चंदिया गढ़ जाटवा। संभुर लंका कोट आदिल नंदा कोयली कोयता। लाजी गढ़ कटंगा कोट कट्टा आदिमा अंगा आरा। लिगो गढ़ मंडला (कोट) पुरुडली कोट आंडुर कोयतुरा। इद निक्को बराते अमोत ताला कोटरसी जय सेवाकृतोनोम।
1. धूपपारा सियाटोमा।
2. कुर्कमका सियाटोनोम।
3. कोया पुंगार तरीहतोनोम।
4. येर साराकेटोनोम।
अर्थः- हे कोयतागण खण्डक कोयमूरी द्वीप के आदि पुरखों गढ़ देवी और देवता हे समुन्द्र कोट हरवाकोट (हडप्पा) पुरवाकोट (सूर्योदयाचल) पूर्वाकोट (मोहन जोदड़ो सिन्धु) पाताल कोट, नर्वाकोट बरवाकोट, परगनाकोट, सुदामकोट, सुमालकोट, सिर्वाकोट, सियामकोट, संभल कोट, चादिया कोट, चाइबा कोट, शभूर कोट, लंका कोट, अदिमा कोट, नाडा कोट, कोयली कोट, लांजी कोट, कटंगा कोट, अदिमा कोट, लिंगा कोट, पुरुंडली कोट, आदि सम्पूर्ण कोयटगण खण्डक के सिद्ध प्रयोजनों की हम सभी कोयतुर सगाजन इस पवित्र बेला में वन्दना करते हैं, स्मरण करते हैं पूजा करते हैं, नतमस्तक हो शत-शत प्रणाम करते हैं, सेवा करते हैं कि हमारा मन पूर्ण है।(@)
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