मूढ़ पूजा विधि विधान
पारिवारिक पूजा विधान निर्माण समय कुछ नियम विधि विधानों का पालन करना चाहिए।
1. गोंडी पुनेम के उपासक इस बात का विशेष ध्यान दें कि वह पूजन कार्य तमी संपत्र पात्रं जब कि परिवार के सभी सदस्यगण शुद्ध पवित्र हों। इसी प्रकार भुमका, पुजारी या बाघा जो पूजन कार्य करता है वह भी नियमों का पालन करने को कहता है।
2. मिट्टी से पूजन स्थल को लीप कर शुद्ध करें। उस पर पीसी हल्दी माँ आटा से चौक बनायें।
3. लकड़ी का पत्ता या साजा या साई के पटाल चौक के बीचों-बीच।
4. पांचवां कलश पानी नामांकन चौक चार और मध्य भाग में एक कलश दीप जलाना स्थान। चार कलश छोटे एवं एक बड़ा होना चाहिए।
5 भुमका, पुजारी या बागा को दक्षिण की ओर मुख करके पूजा करनी चाहिए।
6. पूजा में बैठने वालों की दिशा जिसमें पति-पत्नी या किसी भी व्यक्ति का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।
7.पूजा करने वाले को नया धोती कुर्ता और महिमा को भी नई पोशाक पहनना चाहिए।
8.पूजा वाले भुमका को धोती कुर्ता और पगड़ी शिष्टमंडल की उपाधि।
9.पूजा करने वालों को भी पलास के पत्तलों का आसन करना चाहिए।
10. पूजन के दिन उपवास रखना चाहिए और पूजन विधान पर ही भोजन ग्रहण करना चाहिए।
11. पूर्वान्हित अर्थात रविवार को पूजा करना शुभ माना जाता है।
12.चौके के पटल पर कलश के सामने फड़ापेन के नाम से एक मुठ पांच भुमका सगाओं के नाम से पांच मुठ और सात सगाओं के नाम से सात मुठ चांवल या जवारी क्रमवार कतार से रखा गया।
(@)
No comments:
Post a Comment