परंड मुठवा सुमरन मंत्र
(आदि गुरू कुपार लिंगो का स्मरण मंत्र)
सैराल गौरा सरेका मरी पहान्दिपुंगार पुयनेमता माता सरी हीरा सुका रायलिंगों धनेत्तिर महारू भूमकाय सुयमोद वेरची मुठवाले देवगन रयतार जंगो अन्धकारी धुन्धकारि कोइलानु मेदी। इद मावा सुमिरन पार्रड मुठवा मिन्नेत मावा इमा केंजा केंजा। इमा हर्कोटा मुर्कोटा पुर्कोटा रायोर।। कुर्कमका तरिहची आन्दुर ।। गुणगा सिन्धाली बिन्दाली कजौली। इदामा युम्मा सुल्जा येरकोली ।। पुलशिव रायोर हिर्वा नोर मरी। कोया पुनेमता सीतोनी सर्रा ।। पहांदी पुंगार कुपार जय जय। जौहार जौहार जय सेवा जय जय।। इमा कॅजा कॅजा मिनेन्त मावा। मिनेन्त मावा इमा केंजा कॅजा।।
ओ मावोर जय परसापेन सल्लेरे गांगेर लिंगो सुयमोद बेरचरी। जय सगापेन पार्रड सगा गोगोंनुंग अमोट मीकुन ।
अर्थ:- हर्कोटा मुक्कोटा पुक्कोटा गणराज्य के महाराज पुलशिव और माता हिर्वा के सुपुत्र आदि गुरू पहंदी पारी कुपार लिंगो आपको सेन्दुर हल्दी चांवल अर्पण करते हुए हम कोया वंशीय गाजन नमन करते हैं वंदना करते हैं।
हे आदि गुरू पहंदी पारी कुपार लिंगो (मुठवा) अपने कोयावंशियों को गोंडी धर्म से चलने का सत्य मार्ग दिया है। ऐसे महान योगी श्रेष्ठ धर्म गुरू को हमारी सेवा सेवा और हम कोयावंशी सगाजन प्रार्थना करते हैं कि आप हमारी मनोकामनायें पूर्ण करें।
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