पंच तत्वों की पूजा
सुर्वेय भुमटिया मटिया लमोटिया। सुर्वेय उमोटिया सुक्ति अद्धिटियां। सुर्वेय सल्ले गांगेर सुर्वेय। सुर्वेय फड़ापेन सुक्ति तत्वानु संयु ।।
ओ इद सिदडी सिगार सृष्टि तांग चण्ड अखण्ड प्रचण्ड संयु तत्वानुंग, इद निक्को बेरा अमोट मीकुन सुमिरन कियातोमा। ओ सावोर जय परसापेन सल्लेर गांगेर लिगों सुयमोद वेरची जय सगा पेन पार्रड सगा गोगोतुंग अमोट मीकुन ।
ओऽऽऽ इद मावा सिरडी सिंगार संयुगार द्धिपता आरूंग खण्ड घरती नारूंग खण्ड पिरथी येरुंग समुन्दर पद सारूंग धारा संयु रन्ड लाख झाडीता पूजा कियातोमा सुमिरन कियातोरोम ।
1. येर सारे कियातोरोम ।
2. घूप पारा सियातोमा ।
3. कोया पुंगार पडरी पुंगार सियोतामा।
4. कुर्कमका तरिहत्तोमा ।
5. शेंदबुर्का सियातोमा।
6. अमोट येर तरिहत्तोमा।
अर्थ :- हे सर्व श्रेष्ठ आदि षक्ति धरती माँ एवं वायु देवता, जल देवता, अग्नि देवता और अनन्त प्रकाश के अनगिनत ग्रह नक्षत्रों, हे सर्वशक्तिमान आदि पिता हे आदिशक्ति माँ हम कोयतुर मानव सम्पूर्ण निराकार अनादि पंच तत्वों की वंदना करते हैं स्मरण करते है, पूजा करतेहैं। इन अनन्त दृष्टि के पृथ्वी में जो आठ खण्ड (सतह नौ द्वीप है) सात सम समुंदर सोलह प्रकार के जलधारा है और जो बावन लाख वनस्पत्तियां है। उनकी मैं वंदना करता हूँ स्मरण करता हूँ पूजा करता हूँ।
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